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धनिया उत्पादक किसान ने 1 दिन में 2 लाख की कमाई की, जानें कैसे

धनिया उत्पादक किसान ने 1 दिन में 2 लाख की कमाई की, जानें कैसे

संजय बिरादर नाम के एक किसान ने धनिया बेचकर लाखों रुपये की आमदनी की है। संजय बिरादर ने एक एकड़ में धनिया की खेती कर रखी है। भारत में महंगाई सातवें आसमान पर पहुंच चुकी है। विशेष कर हरी सब्जियां काफी महंगी हो गई हैं। तोरई, परवल, शिमला मिर्च, हरी मिर्च, धनिया, भिंडी और लौकी समेत समस्त प्रकार के साग-सब्जियों की कीमतें कई गुना ज्यादा बढ़ गई हैं। परंतु, टमाटर का भाव सबसे ज्यादा लोगों को रुला रहा है। एक माह पूर्व तक 20 से 30 रुपये किलो मिलने वाला टमाटर अब 250 से 350 रुपये किलो तक पहुँच गया है। ऐसे में टमाटर बेचकर टमाटर उत्पादक किसान करोड़पति बन गए हैं।

धनिया उत्पादक किसान कर रहे मोटी आमदनी

खास कर महाराष्ट्र और हिमाचल प्रदेश में
टमाटर बेचकर करोड़ों रुपये की आय करने वाले किसानों की तादात सबसे ज्यादा है। इन किसानों का कहना है, कि उन्होंने कभी स्वप्न में भी नहीं सोचा था, कि वे अपनी जिन्दी में टमाटर बेचकर करोड़पति हो पाऐंगे। क्योंकि फरवरी एवं मार्च महीने के दौरान टमाटर थोक बाजार में काफी सस्ता हो गया था। किसान 2 से 3 रुपये किलो टमाटर बेचने के लिए विवश हो गए थे। परंतु, फिलहाल खबर है, कि केवल टमाटर ही नहीं धनिया की खेती करने वाले किसानों का भी अच्छा समय आ गया है। धनिया महंगा होने की वजह से धनिया उत्पादक किसान टमाटर उत्पादकों की भाँति ही मोटी कमाई कर रहे हैं। ये भी पढ़े: इन राज्यों में 200 रुपए किलो के टमाटर को राज्य सरकार की मदद से 60 रुपए किलो में बेचा जा रहा है

संजय बिरादर को हुई 2 लाख रुपये की आमदनी

यह ताजा मामला महाराष्ट्र के लातूर जनपद का है। यहां के संजय बिरादर नाम के एक किसान ने धनिया बेचकर लाखों रुपये की आमदनी अर्जित की है। संजय बिरादर ने एक एकड़ भूमि में धनिया की खेती कर रखी है। इस महंगाई में वह धनिया बेचकर 2 लाख रुपये की आमदनी कर चुके हैं। उनका कहना है, कि रिटेल मार्केट में अभी धनिया 200 से 300 रुपये प्रतिकिलो है। ऐसी स्थिति में व्यापारी किसानों के खेत से ही 100 रुपये किलो की दर से धनिया की हरी- हरी पत्तियां खरीद रहे हैं। यही वजह है, कि संजय ने एक एकड़ में लगी धनिये की संपूर्ण फसल को एक व्यापारी के हाथों बेच डाला, जिससे उन्हें 2 लाख रुपये की आमदनी हुई।

धनिये की फसल 30 से 40 दिन के समयांतराल में पककर तैयार हो जाती है

संजय बिरादर ने बताया है, कि एक एकड़ में धनिया की खेती करने पर 50 हजार रुपये का खर्चा आया था। इस प्रकार संजय ने लागत काटकर डेढ़ लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया है। खास बात यह है, कि धनिया की फसल 30 से 40 दिन के अंदर तैयार हो जाती है। इस वजह से संजय को देखकर फिलहाल क्षेत्र में बहुत सारे किसानों ने धनिया की खेती करने की योजना बनाली है। साथ ही, बहुत से किसानों ने तो धनिया की बिजाई भी चालू कर दी है। हालांकि, अभी भी बाजार भाव की तुलना में किसानों को धनिया की आधी कीमत ही मिल पा रही है।
सुगंधित धनियां लाए खुशहाली

सुगंधित धनियां लाए खुशहाली

धनियां मसालों और आमतौर पर हर घर में उपयोग में लाया जाता है। इसके पत्तों की महक किसी भी सब्जी के जायके में चार चांद लगाने का काम करती है। इसमें अनेक ओषधीय गुण भी हैं। इसके चलते इसकी खेती बेहद लाभकारी है। इसकी खेती देश के आधे से हिस्से में कम कहीं ज्यादा होती है। इसकी खेती के लिए भी बलुई दोमट मिट्टी अच्छी रहती है। बेहतर जल निकासी वाली जमीन में धनियां लगाया जाना उचित होता है। धनियां को कतर कर बेचना एवं जड़ सहित बेचने की प्रक्रिया मंडियों के अनुरूप अपनाएं। 

धनियां की किस्में

 

 वर्तमान दौर में किसी भी खेती के लिए उस इलाके के चिए संस्तुत किस्मों का चयन बेहद जरूरी है। राजस्थान के कोटा अदि में धनियां की अच्छी खेती होती है। वहां की किस्में भी कई गर्म इलाकों में बेहद अच्छी सुगंध और उत्पादन दानों दे रही हैं। इसके अलावा गुजरात धनियां 1 व 2, पंत धनियां 1, मोरोक्कन, सिमपो एस 33, ग्वालियर 5365, जवाहर 1, सीएस 6, आरसीआर 4, सिंधु, हरीतिमा, यूडी 20 साहित अनेक किस्में बाजार में मौजूद हैं। किसानों को सलाह दी जाती है कि वह किसी भी नई खेती को करने से पूर्व अपने जनपद के कृषि या उद्यान अधिकारी या कृषि विज्ञान केन्द्रों के विशेषज्ञों से संपर्क करें ताकि उन्हें उचित जानकारी प्राप्त हो सके।

धनियां की खेती के लिए जमीन की सिंचाई कर तैयार करें। इससे पूर्व सड़ी हुई गोबर की खाद खेत में जरूर डालें। धनियां की बिजाीई हेतु 5-5 मीटर की क्यारियां बना लें, जिससे पानी देने में और निराई-गुड़ाई का काम करने में आसानी रहे। 

बुवाई का समय

 

 धनिया की फसल के लिए अक्टुंबर से नवंबर तक बुवाई का उचित समय रहता है। बुवाई के समय अधिक तापमान रहने पर अंकुरण कम हो सकता है। बुवाई का निर्णय तापमान देख कर करें। क्षेत्रों में पला अधिक पड़ता है वहां धनिया की बुवाई ऐसे समय में न करें, जिस समय फसल को अधिक नुकसान हो।

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बीजदर व बीजोपचार

 

 धनियां का 15 से 20 किलोग्राम बीज पर्याप्त होता है। बीजोपचार के लिए दो ग्राम कार्बेंडाजिम प्रति किलो बीज की दर से उपचारित करें। बुवाई से पहले दाने को दो भागों में तोड़ देना चाहिए। ऐसा करते समय ध्यान दे अंकुरण भाग नष्ट न होने पाए और अच्छे अंकुरण के लिए बीज को 12 से 24 घंटे पानी में भिगो कर हल्का सूखने पर बीज उपचार करके बोएं। सिंचित फसल में बीजों को 1.5 से 2 सेमी. गहराई पर बोना चाहिए, क्योंकि ज्यादा गहरा बोने से सिंचाई करने पर बीज पर मोटी परत जम जाती हैं, जिससे बीजों का अंकुरण ठीक से नहीं हो पाता हैं।

खरपतवार नियंत्रण

धनिये में शुरूआती बढ़वार धीमी गति से होती हैं इसलिए निराई-गुड़ाई करके खरपतवारों को निकलना चाहिए। सामान्यतः धनिये में दो निराई-गुड़ाई पर्याप्त होती है। पहली निराई-गुड़ाई के 30-35 दिन पर व दूसरी 60 दिन पर अवश्य करेंं। खरपतवार नियंत्रण के लिए पेन्डीमिथालीन 1 लीटर प्रति हेक्टेयर 600 लीटर पानी में मिलाकर अंकुरण से पहले छिड़काव करें। ध्यान रखें कि छिड़काव के समय भूमि में पर्याप्त नमी होनी चाहिए और छिड़काव शाम के समय करें।